क्यों रद्द हुआ SI भर्ती 2021 पर रोक लगाने का फ़ैसला ? 

क्यों रद्द हुआ SI भर्ती 2021 पर रोक लगाने का फ़ैसला ? 
क्यों रद्द हुआ SI भर्ती 2021 पर रोक लगाने का फ़ैसला ? 

जयपुर, 8 सितंबर 2025 – राजस्थान उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें 28 अगस्त 2025 को एकल पीठ ने राजस्थान पुलिस उप-निरीक्षक (SI) भर्ती 2021 को रद्द कर दिया था। इस भर्ती के तहत कुल 859 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी हुई थी।

क्यों रद्द हुआ SI भर्ती  2021 पर रोक का फेसला?

28 अगस्त को न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने भर्ती रद्द करने का आदेश दिया था। इस दौरान पेपर लीक, फर्जी उम्मीदवारों की भागीदारी और RPSC के छह सदस्यों से जुड़ी साक्षात्कार प्रक्रिया में अनियमितताओं का हवाला दिया गया था। कोर्ट ने इसे संपूर्ण चयन प्रक्रिया को दूषित मानते हुए रद्द कर दिया। इस फैसले से उन उम्मीदवारों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया था, जो पहले से प्रशिक्षण लेकर फील्ड में सेवा दे रहे हैं।

अपील और डिवीजन बेंच का फैसला

चयनित अभ्यर्थियों के एक समूह ने अधिवक्ता अलंकृता शर्मा के माध्यम से अपील दायर की। उनका तर्क था कि सभी उम्मीदवार अनियमितताओं में शामिल नहीं थे, ऐसे में पूरी भर्ती को रद्द करना ईमानदार उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।


डिवीजन बेंच ने इन तर्कों को उचित मानते हुए एकल पीठ के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। फिलहाल भर्ती की वैधता बनी रहेगी और चयनित उम्मीदवार अपनी सेवाओं पर बने रहेंगे।

रोक के पीछे प्रमुख आधार

  1. ईमानदार उम्मीदवारों की सुरक्षा – सभी अभ्यर्थियों को दोषी मानना न्यायसंगत नहीं।
  2. सेवारत SI का भविष्य – कई उम्मीदवार पहले से ही SI पद पर कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति रद्द करना विभागीय कामकाज को बाधित करता।
  3. गहन जांच की ज़रूरत – कोर्ट ने माना कि यह मामला जटिल है और दोषी व निर्दोष उम्मीदवारों को अलग करने की प्रक्रिया पर और सुनवाई आवश्यक है।
  4. जनहित व प्रशासनिक स्थिरता – एक साथ पूरी भर्ती रद्द करने से पुलिस विभाग में खाली पद और प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है।

वर्तमान स्थिति

  • भर्ती प्रक्रिया अभी वैध मानी जाएगी।
  • चयनित उम्मीदवार अपनी सेवाओं पर बने रहेंगे।
  • फील्ड पोस्टिंग पर लगी रोक यथावत रहेगी।
  • अगली सुनवाई में तय होगा कि भर्ती आंशिक रूप से या पूरी तरह रद्द होगी या नहीं।

प्रतिक्रियाएँ

👉 चयनित उम्मीदवारों और उनके परिवारों ने राहत की सांस ली है।
👉 वहीं, जिनका मानना है कि पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार से प्रभावित थी, वे इस रोक को न्याय में देरी मान रहे हैं।
👉 राज्य सरकार ने अभी तक अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट नहीं किया है।

आगे का रास्ता

डिवीजन बेंच ने साफ किया है कि अगली सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएंगी। संभव है कि कोर्ट केवल दोषी चयनों को रद्द करने या भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करे।

यह फैसला न केवल हजारों उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाली भर्तियों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से निपटने के लिए किस तरह के नए मानक स्थापित होंगे।

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