
राजस्थान सरकार ने सभी विभागों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों का दोबारा मेडिकल टेस्ट कराने का आदेश जारी किया है। सरकार का यह कदम उन मामलों के मद्देनज़र उठाया गया है जहाँ फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरियों में नियुक्तियाँ होने की शिकायतें मिली हैं।
फर्जी प्रमाण पत्रों पर कड़ी कार्रवाई
सरकार ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि कई उम्मीदवारों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान दिव्यांग कोटे का अनुचित लाभ उठाया। इस पर रोक लगाने के लिए अब सभी विभागों में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। जांच में अगर कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और नौकरी भी जा सकती है।
किन कर्मचारियों की होगी जांच?
- राज्य सरकार के सभी विभागों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारी
- पिछले 10 वर्षों में सेवा में आए दिव्यांग कर्मचारी
- उन कर्मचारियों की भी जांच होगी जिन्होंने नौकरी लगने के बाद दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया
जांच की प्रक्रिया
- कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा अधिकृत मेडिकल बोर्ड से मेडिकल टेस्ट कराना होगा।
- रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि कर्मचारी को दिव्यांग श्रेणी में रखा जा सकता है या नहीं।
- फर्जी प्रमाण पत्र पाए जाने पर प्रमाण पत्र तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा।
भर्ती परीक्षाओं पर भी असर
सरकार ने केवल वर्तमान कर्मचारियों तक ही यह आदेश सीमित नहीं रखा है, बल्कि भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में भी इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसका असर RPSC, RSMSSB, पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी पड़ेगा।
- भर्ती परीक्षाओं में अब दिव्यांग प्रमाण पत्र की सख्त जांच होगी।
- उम्मीदवारों को केवल अधिकृत मेडिकल संस्थानों से जारी प्रमाण पत्र ही मान्य होंगे।
पृष्ठभूमि: भास्कर ने किया था खुलासा
हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ था कि कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं जैसे RAS, REET और पुलिस भर्ती में कुछ उम्मीदवारों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र लगाकर चयन प्राप्त किया। इसके बाद सरकार पर कड़ी कार्रवाई का दबाव बना और अब यह आदेश जारी किया गया है।
सरकार का उद्देश्य
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है:
- भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना
- वास्तविक दिव्यांग उम्मीदवारों को उनका हक दिलाना
- फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी पाने वालों पर रोक लगाना
निष्कर्ष
राजस्थान सरकार का यह फैसला हजारों कर्मचारियों को प्रभावित कर सकता है। अब सभी विभागों के दिव्यांग कर्मचारियों को मेडिकल जांच से गुजरना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वास्तविक पात्र उम्मीदवारों के लिए राहत और फर्जीवाड़ा करने वालों के लिए कड़ी चेतावनी साबित होगा।

